पूर्णिया/अररिया/सुपौल: बिहार में रियल एस्टेट और सामाजिक
गतिविधियों को लेकर चर्चित पनोरमा ग्रुप के कार्यालयों और समूह के निदेशक संजीव मिश्रा
के आवास पर आयकर विभाग की छापेमारी परसों यानी 10 फरवरी से लगातार जारी है। यह कार्रवाई
तीसरे दिन भी थमी नहीं है, जिससे इलाके में हलचल तेज हो गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आयकर
विभाग की टीमें पनोरमा ग्रुप के अररिया, सुपौल समेत अन्य कार्यालयों में दस्तावेजों
की गहन जांच कर रही हैं। सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि इन कार्यालयों से
विभाग को कुछ अहम जानकारियां और दस्तावेज मिले हैं, जिनकी अब विस्तृत पड़ताल की जा
रही है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि ये दस्तावेज वित्तीय लेन-देन, निवेश और खातों
से जुड़े हो सकते हैं।
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक
आयकर विभाग वर्ष 2021 से पनोरमा ग्रुप के सभी बैंक खातों की गहन जांच कर रहा है। इस
दौरान समूह से जुड़े कई खातों, लेन-देन और वित्तीय रिकॉर्ड को खंगाला जा रहा है। बताया
जा रहा है कि जांच के दायरे में बड़े पैमाने पर हुए खर्च, आय के स्रोत और कर भुगतान
से संबंधित पहलुओं को भी शामिल किया गया है।
इस छापेमारी के दौरान पनोरमा
ग्रुप के निदेशक संजीव मिश्रा के अलावा नंदन झा और अकाउंट अफसर प्रिया से भी लगातार
पूछताछ चल रही है। सूत्रों के अनुसार, इन सभी से कंपनी के वित्तीय लेन-देन, खातों के
संचालन और दस्तावेजों में दर्ज विवरणों को लेकर सवाल-जवाब किए जा रहे हैं। बताया जा
रहा है कि पिछले तीन दिनों से आयकर विभाग के कई अधिकारी संजीव मिश्रा के आवास पर मौजूद
हैं और वहीं पर पूछताछ की प्रक्रिया चल रही है।
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा
किया जा रहा है कि संजीव मिश्रा, नंदन झा और अकाउंट अफसर प्रिया को फिलहाल घर से बाहर
जाने की अनुमति नहीं दी गई है। साथ ही, उन्हें किसी से फोन पर बातचीत करने की भी इजाजत
नहीं है। हालांकि, इस संबंध में आयकर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया
गया है।
अखबारों और स्थानीय चर्चाओं में
पनोरमा ग्रुप और संजीव मिश्रा की भव्य जीवनशैली को लेकर भी कई बातें सामने आ रही हैं।
खबरों के मुताबिक, पनोरमा ग्रुप के स्थापना दिवस के अवसर पर पूर्णिया स्थित ई-होम्स
में बड़े-बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे, जिनमें कई नामचीन राजनेता और बॉलीवुड
से जुड़ी हस्तियां शामिल होती थीं। इन आयोजनों में लाखों की संख्या में लोगों के जुटने
और हजारों लोगों को भोजन कराने की बातें भी सामने आई हैं। बताया जाता है कि इन कार्यक्रमों
पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते थे, जिसे लेकर अब आयकर विभाग की नजर इन खर्चों के स्रोत
पर भी बताई जा रही है।
फिलहाल आयकर विभाग की कार्रवाई
जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि दस्तावेजों और खातों में
क्या अनियमितताएं पाई गई हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के
बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा। वहीं, इस कार्रवाई से जुड़े हर नए खुलासे पर
पूरे इलाके की निगाहें टिकी हुई हैं।
विश्लेषण
पनोरमा ग्रुप और उसके निदेशक
संजीव मिश्रा के ठिकानों पर चल रही आयकर विभाग की लगातार छापेमारी केवल एक नियमित कर-जांच
नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका की ओर इशारा करती है। वर्ष
2021 से बैंक खातों की जांच और अब कार्यालयों से मिले दस्तावेजों की गहन छानबीन यह
संकेत देती है कि आय, खर्च और कर भुगतान के बीच गंभीर अंतर हो सकता है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण
हो जाता है क्योंकि पनोरमा ग्रुप का सामाजिक और राजनीतिक दायरा काफी व्यापक रहा है।
स्थापना दिवस जैसे आयोजनों में करोड़ों रुपये खर्च होना, हजारों लोगों को भोजन कराना
और बड़े राजनीतिक व फिल्मी चेहरों की मौजूदगी—ये सभी पहलू अब जांच के दायरे में स्वाभाविक
रूप से सवाल खड़े करते हैं कि इतनी बड़ी धनराशि का स्रोत क्या था और क्या उसका ‘कर’
अनुपालन सही तरीके से हुआ।
संजीव मिश्रा और अन्य अधिकारियों
से लगातार पूछताछ तथा बाहर जाने या फोन करने की कथित पाबंदी यह दर्शाती है कि जांच
एजेंसी इस मामले को बेहद संवेदनशील मान रही है। हालांकि, जब तक आधिकारिक निष्कर्ष सामने
नहीं आता, तब तक किसी भी तरह का अंतिम निर्णय या आरोप लगाना जल्दबाजी होगी। फिर भी,
यह कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश देती है कि बड़े नाम, प्रभाव या सामाजिक छवि कानून से
ऊपर नहीं हैं और वित्तीय पारदर्शिता से कोई भी समझौता अंततः जांच के घेरे में आ सकता
है। यह देखना भी
दिलचस्प होगा कि कहीं इसमें कोई बड़े 'सफेदपोश' भी तो शामिल नहीं हैं?
***
Video link: https://youtu.be/I9oOLiBH80k



Recent Comments