बिहार विधानसभा
चुनाव में एनडीए की ऐतिहासिक जीत के बाद नई सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है।
बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (यूनाइटेड) (जेडीयू) दोनों दलों
ने अपने-अपने विधायक दल की बैठकें कीं और नेतृत्व का औपचारिक चयन कर लिया। इससे
राज्य की राजनीति में नए चरण की शुरुआत हो गई है।
बीजेपी की
विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी को सर्वसम्मति से भाजपा विधायक दल का नेता
चुना गया, जबकि विजय कुमार सिन्हा को उप नेता बनाया गया। इस
बैठक में यूपी के डिप्टी सीएम और बिहार बीजेपी पर्यवेक्षक केशव प्रसाद मौर्य,
सांसद सह सह-पर्यवेक्षक साध्वी निरंजन ज्योति, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, प्रदेश अध्यक्ष
दिलीप जायसवाल, वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र प्रधान, विनोद तावड़े और बड़ी संख्या में नव निर्वाचित विधायक तथा विधान पार्षद
मौजूद रहे।
पार्टी नेताओं
का कहना है कि सम्राट चौधरी का चयन संगठन और सत्ता के बीच बेहतर सामंजस्य का संकेत
है। वे पिछड़े वर्ग से आते हैं और युवा नेतृत्व के प्रतीक माने जाते हैं। इससे
भाजपा संगठन के भीतर नई ऊर्जा का संचार हुआ है।
जेडीयू
में नीतीश बने सर्वसम्मति से नेता
इसी के समानांतर
जेडीयू की विधायक दल की बैठक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर आयोजित की गई, जहां सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को विधायक दल का नेता चुन लिया गया। बैठक
में सभी नवनिर्वाचित विधायक, विधान पार्षद और वरिष्ठ नेता
मौजूद रहे। सांसद और पार्टी अध्यक्ष ललन सिंह ने बैठक के बाद घोषणा करते हुए कहा
कि “जेडीयू विधायक दल एकमत है — नीतीश कुमार ही हमारे नेता हैं, और बिहार के मुख्यमंत्री पद के लिए सर्वश्रेष्ठ विकल्प।”
सभी विधायकों ने
नीतीश कुमार पर भरोसा जताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में बिहार ने स्थिरता और
सुशासन का अनुभव किया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैठक के बाद नीतीश
कुमार ने कहा कि “अब गठबंधन एकजुट होकर बिहार के विकास को नई गति देगा।”
एनडीए
की संयुक्त बैठक आज दोपहर
दोनों दलों में
नेतृत्व तय होने के बाद अब गठबंधन स्तर पर रणनीति तय करने की बारी है। इसके लिए
बुधवार दोपहर 3 बजे विधानसभा के सेंट्रल हॉल में एनडीए विधायक दल की
संयुक्त बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में बीजेपी, जेडीयू और
सहयोगी दलों — लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हम
(हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) और रालोमो (राष्ट्रीय लोकमत संगठन) — के विधायक शामिल
होंगे।
सूत्रों के
मुताबिक, इस संयुक्त सत्र में नीतीश कुमार को एनडीए विधायक दल
का नेता औपचारिक रूप से चुना जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इसी बैठक
के बाद मुख्यमंत्री पद, उपमुख्यमंत्री पदों के नाम, संभावित मंत्रियों और विभागीय बंटवारे को लेकर घोषणाएं हो सकती हैं।
गांधी
मैदान में ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह
बिहार में नई
सरकार के शपथ ग्रहण समारोह की पूरी तैयारी हो चुकी है। मुख्यमंत्री पद की शपथ
नीतीश कुमार 20 नवंबर, गुरुवार को पटना के
ऐतिहासिक गांधी मैदान में लेंगे। समारोह पूर्वाह्न 11:30 बजे
शुरू होगा।
इस कार्यक्रम
में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की संभावना है, जबकि गृह मंत्री अमित शाह बुधवार की देर रात पटना पहुंचेंगे। समारोह में
कई केंद्रीय मंत्री, भाजपा और जेडीयू के वरिष्ठ नेता,
राज्यपाल तथा पूर्व मुख्यमंत्री भी मौजूद रहेंगे। गांधी मैदान को
विशेष सुरक्षा घेरे में लिया गया है और राज्य प्रशासन द्वारा भव्य आयोजन की तैयारी
की जा रही है।
दो
उपमुख्यमंत्री और 20 मंत्रियों की संभावित टीम
राजनीतिक
सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार इस बार दो उपमुख्यमंत्रियों और लगभग 20
मंत्रियों के साथ शपथ ले सकते हैं। भाजपा और जेडीयू कोटे के साथ-साथ
लोजपा (रा), हम और रालोमो को भी कैबिनेट में प्रतिनिधित्व
मिलेगा।
भाजपा नेताओं के
अनुसार, मंत्रिपरिषद सूची को अंतिम रूप गृह मंत्री अमित शाह
दे रहे हैं। इस सूची में क्षेत्रीय संतुलन, जातीय विविधता और
अनुभव को वरीयता दी गई है। वहीं, रालोमो कोटे से सासाराम से
पहली बार विधायक बनीं प्रोफेसर स्नेहलता को मंत्री बनाए जाने की संभावना है।
सूत्र बताते हैं
कि नई कैबिनेट में कुछ युवा चेहरों को भी मौका दिया जा सकता है ताकि सरकार में
अनुभव और नवाचार का संतुलन बना रहे।
राजनैतिक
माहौल में नई उम्मीदें
एनडीए की प्रचंड
जीत और सरकार गठन की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल बनी हुई है।
भाजपा और जेडीयू के दफ्तरों में जश्न का माहौल है जबकि महागठबंधन खेमे में रणनीतिक
समीक्षा बैठकों का दौर जारी है।
राजनीतिक
विश्लेषक मानते हैं कि यह नीतीश कुमार के राजनीतिक करियर का निर्णायक चरण साबित हो
सकता है। यह उनका दसवां शपथ ग्रहण होगा – जो भारतीय राजनीति में दुर्लभ रिकॉर्ड
है। अब उनके सामने जनता की बड़ी अपेक्षाओं को पूरा करने की चुनौती है, खासकर रोजगार, निवेश और शिक्षा सुधार के क्षेत्रों
में।
एनडीए नेतृत्व
का कहना है कि बिहार में स्थिर सरकार के माध्यम से विकास योजना को नई दिशा दी
जाएगी। मुख्यमंत्री के करीबी सूत्रों के मुताबिक, 'सात निश्चय पार्ट-2'
को प्राथमिकता दी जाएगी और अगले सौ दिनों की कार्ययोजना तय की जा
चुकी है।



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