पूर्णिया: भारतीय जनता पार्टी के 45 वर्षों
के सियासी इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के
लिए नितिन नबीन निर्विरोध चुने गए। वे भारतीय जनता पार्टी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष
बने हैं। खास बात यह है कि नितिन नबीन सबसे काम उम्र के अध्यक्ष बने यानि मात्र 45
वर्ष की आयु में। संयोग देखिए कि पार्टी की उम्र भी 45 वर्ष है—यानी 45 की पार्टी को 45 साल का अध्यक्ष।
लोकसभा चुनाव 2024 के बाद ही
भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल औपचारिक रूप
से समाप्त हो चुका था। इसके बाद पार्टी ने संगठनात्मक प्रक्रिया को पूरा करते हुए राष्ट्रीय
अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की। सोमवार को दोपहर 2 बजे से 4 बजे के बीच नामांकन
का समय तय किया गया था, जिसमें नितिन नबीन ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। उनके प्रस्तावकों
में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जैसे शीर्ष नेता शामिल
रहे।
चूंकि अध्यक्ष पद के लिए नितिन
नबीन के अलावा किसी अन्य नेता ने नामांकन नहीं किया, इसलिए उनका निर्विरोध चुना जाना
तय था। आज मंगलवार को प्रधानमंत्री की मौजूदगी में उनके नाम की औपचारिक घोषणा कर दी
गई।
बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव कैसे
होता है
भारतीय जनता पार्टी में राष्ट्रीय
अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया बहु-स्तरीय और संगठनात्मक होती है। सबसे पहले राज्यों
में संगठनात्मक चुनाव पूरे किए जाते हैं। इसके बाद राष्ट्रीय परिषद और राज्य परिषदों
के निर्वाचित प्रतिनिधियों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष का
चयन किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया की देखरेख पार्टी के राष्ट्रीय निर्वाचन अधिकारी
करते हैं।
पार्टी के संविधान के अनुसार,
किसी भी उम्मीदवार का कम से कम चार कार्यकाल तक सक्रिय सदस्य होना और 15 वर्षों की
प्राथमिक सदस्यता पूरी करना अनिवार्य है। साथ ही, प्रस्ताव कम से कम पांच राज्यों से
आने चाहिए, जहां राष्ट्रीय परिषद के चुनाव संपन्न हो चुके हों। इस बार राष्ट्रीय निर्वाचन
अधिकारी लक्ष्मण द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की गई थी, जिसमें 20 जनवरी को मतदान
की संभावना भी रखी गई थी। हालांकि, एकमात्र उम्मीदवार होने के कारण मतदान की आवश्यकता
नहीं पड़ी।
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्षों
का सियासी सफर
भारतीय जनता पार्टी की स्थापना
6 अप्रैल 1980 को जनता पार्टी से अलग होकर की गई थी। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी,
लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विजयाराजे सिंधिया और सिकंदर
बख्त जैसे नेताओं ने पार्टी की नींव रखी थी।
- अटल
बिहारी वाजपेयी
(1980–1986) पार्टी के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।
- 1984
में महज दो सीटों पर सिमटने के बाद पार्टी की कमान लाल कृष्ण आडवाणी
(1986–1991) को सौंपी गई। उनके नेतृत्व में आक्रामक हिंदुत्व और राम मंदिर आंदोलन
ने पार्टी को नई पहचान दी।
- 1991
में मुरली मनोहर जोशी अध्यक्ष बने। उनके कार्यकाल में तिरंगा यात्रा और
1992 का अयोध्या आंदोलन ऐतिहासिक घटनाएं रहीं।
- 1993
से 1998 तक आडवाणी दोबारा अध्यक्ष बने और इसी दौरान केंद्र में पहली बार बीजेपी
की सरकार बनी।
इसके बाद पार्टी की कमान कुशाभाऊ
ठाकरे, बंगारू लक्ष्मण, जेना कृष्णमूर्ति, वेंकैया नायडू,
और फिर तीसरी बार लाल कृष्ण आडवाणी को सौंपी गई।
2005 में राजनाथ सिंह
अध्यक्ष बने, फिर नितिन गडकरी (2010–2013) और दोबारा राजनाथ सिंह
(2013–2014) ने संगठन संभाला। 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पार्टी
का स्वर्णिम दौर शुरू हुआ।
इसके बाद अमित शाह
(2014–2020) ने संगठन का व्यापक विस्तार किया और 2019 में पार्टी को दोबारा पूर्ण बहुमत
दिलाया। 2020 से 2024 तक जेपी नड्डा पार्टी के अध्यक्ष रहे और उनके नेतृत्व
में बीजेपी ने सत्ता की हैट्रिक लगाई।
नितिन नबीन: युवा नेतृत्व की
नई पहचान
नितिन नबीन की ताजपोशी केवल एक
संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि बीजेपी की भविष्य की राजनीति का संकेत भी है। इससे पहले
सबसे कम उम्र में अध्यक्ष बनने का रिकॉर्ड अमित शाह (49 वर्ष) के नाम था, जबकि नितिन
गडकरी 52 वर्ष की उम्र में अध्यक्ष बने थे। नितिन नबीन ने यह रिकॉर्ड तोड़ते हुए
45 वर्ष की उम्र में शीर्ष पद हासिल किया है।
सामाजिक दृष्टि से भी यह फैसला
महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नितिन नबीन कायस्थ समुदाय से आते हैं, जिसे परंपरागत रूप
से निर्णायक वोट बैंक नहीं माना जाता। इसके बावजूद उन्हें पार्टी की सर्वोच्च संगठनात्मक
जिम्मेदारी देना यह दर्शाता है कि बीजेपी नेतृत्व चयन में जातिगत गणित से ऊपर उठकर
संगठनात्मक क्षमता और राजनीतिक समझ को प्राथमिकता दे रही है।
विश्लेषण
नितिन नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष
बनाना बीजेपी की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है। यह फैसला स्पष्ट संकेत
देता है कि पार्टी अब नेतृत्व परिवर्तन को केवल चुनावी मजबूरी नहीं, बल्कि भविष्य निर्माण
की प्रक्रिया के रूप में देख रही है। 45 वर्ष की उम्र में शीर्ष संगठनात्मक पद सौंपना
युवाओं और नए कार्यकर्ताओं के लिए बड़ा संदेश है कि पार्टी में उम्र नहीं, बल्कि क्षमता
और समर्पण मायने रखता है।
राजनीतिक रूप से यह कदम बीजेपी
को 2029 और उसके आगे की राजनीति के लिए तैयार करता दिखता है। नितिन नबीन जैसे अपेक्षाकृत
युवा और संगठनात्मक अनुभव वाले नेता पार्टी को नई ऊर्जा दे सकते हैं। साथ ही, यह निर्णय
बीजेपी के भीतर शक्ति संतुलन को भी दर्शाता है—जहां मोदी-शाह युग के बाद नेतृत्व की
अगली पंक्ति तैयार की जा रही है।
सामाजिक समीकरणों के लिहाज से
भी यह चयन अहम है। सीमित जनसंख्या वाले समुदाय से आने के बावजूद नितिन नबीन को शीर्ष
पद देना यह साबित करता है कि पार्टी अब प्रतीकात्मक राजनीति से आगे बढ़कर संगठनात्मक
दक्षता पर दांव लगा रही है। कुल मिलाकर, यह ताजपोशी बीजेपी के लिए निरंतरता और परिवर्तन—दोनों
का संतुलित संकेत है।
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वीडियो शामिल
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