सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष किसी भी राजनेता के लिए एक लंबी यात्रा है। नरेंद्र मोदी के मामले में यह यात्रा गुजरात के ख्यमंत्री से लेकर लगातार तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री बनने तक की है। 7 अक्टूबर 2001 को उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी और 2025 में उन्होंने सरकार के प्रमुख के रूप में 25वें वर्ष में प्रवेश किया। अक्टूबर 2001 से मई 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री और मई 2014 से प्रधानमंत्री के रूप में उनका राजनीतिक जीवन भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली अध्यायों में शामिल रहा है।

 

गुजरात से दिल्ली तक

मुख्यमंत्री के रूप में मोदी के सामने 2001 में भूकंप से प्रभावित गुजरात के पुनर्निर्माण, पानी, बिजली, कृषि और औद्योगिक विकास जैसी बड़ी चुनौतियाँ थीं। उनके कार्यकाल में गुजरात में सिंचाई, बिजली, सड़क, औद्योगिक निवेश, कृषि और आधारभूत संरचना पर विशेष जोर दिया गया। समर्थक इसे “गुजरात मॉडल” के रूप में देखते हैं, जबकि आलोचकों ने विकास के लाभों के असमान वितरण और सामाजिक मुद्दों को लेकर अलग-अलग प्रश्न उठाए। स्वयं मोदी ने 2025 में कहा कि गुजरात को कृषि और उद्योग दोनों क्षेत्रों में आगे ले जाने के लिए शासन और बुनियादी ढाँचे पर जोर दिया गया।

2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उनका एजेंडा राष्ट्रीय स्तर पर विस्तृत हुआ। जन धन योजना के माध्यम से बैंकिंग व्यवस्था को गरीबों तक पहुँचाने, स्वच्छ भारत मिशन के जरिए शौचालय और स्वच्छता को जन-अभियान बनाने, उज्ज्वला योजना से गरीब परिवारों को LPG कनेक्शन देने और आयुष्मान भारत के माध्यम से स्वास्थ्य सुरक्षा का विस्तार करने जैसे कार्यक्रम उनकी सरकार की पहचान बने।

इसके साथ प्रधानमंत्री आवास योजना, सौभाग्य, जल जीवन मिशन, पीएम-किसान, मुद्रा योजना, स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसे कार्यक्रमों ने आवास, बिजली, पानी, कृषि आय, उद्यमिता, कौशल और डिजिटल सेवाओं को सरकारी नीति के केंद्र में रखा।

 

अर्थव्यवस्था और प्रशासन में बदलाव

मोदी सरकार ने GST के माध्यम से अनेक अप्रत्यक्ष करों को एक व्यवस्था में लाने, IBC के जरिए दिवालियापन प्रक्रिया को व्यवस्थित करने, Direct Benefit Transfer के जरिए सरकारी लाभ सीधे खातों में भेजने और Government e-Marketplace (GeM) के जरिए सरकारी खरीद में डिजिटल पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास किया।

सरकार के अनुसार, हजारों पुराने अनुपालन और लगभग 1,500 अप्रासंगिक कानून समाप्त किए गए तथा DBT और GeM से सरकारी धन की बचत हुई। PRAGATI जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रधानमंत्री स्तर पर बड़ी परियोजनाओं की निगरानी भी की गई। जनवरी 2026 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार PRAGATI के अंतर्गत ₹85 लाख करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की समीक्षा की जा चुकी थी।

Make in India, Atmanirbhar Bharat और Production Linked Incentive (PLI) के माध्यम से विनिर्माण और घरेलू उत्पादन बढ़ाने की कोशिश हुई। मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उत्पादन और अन्य क्षेत्रों में भारत की उत्पादन क्षमता बढ़ाने को नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया।

 

डिजिटल भारत और नई अर्थव्यवस्था

मोदी काल की एक महत्वपूर्ण पहचान डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना भी रही है। UPI, डिजिटल भुगतान, आधार आधारित सेवाएँ और जन-धन खातों के संयोजन ने बैंकिंग और भुगतान व्यवस्था को बदल दिया। भारत का डिजिटल भुगतान मॉडल दुनिया के कई देशों में चर्चा का विषय बना।

यह परिवर्तन केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहा। छोटे दुकानदार, रेहड़ी-पटरी वाले, किसान और छोटे उद्यमी भी QR कोड और UPI के माध्यम से डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जुड़े।

 

गरीब, महिला, किसान और युवा

मोदी सरकार ने “सबका साथ, सबका विकास” के साथ गरीब कल्याण को राजनीतिक और प्रशासनिक प्राथमिकता बनाया। मुफ्त राशन, आवास, शौचालय, LPG, बैंक खाते और स्वास्थ्य बीमा जैसी योजनाओं ने करोड़ों परिवारों को लक्षित किया।

महिलाओं के लिए उज्ज्वला, स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा, मातृत्व योजनाएँ और नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे कदम उठाए गए। किसानों के लिए PM-KISAN, फसल बीमा, सिंचाई और कृषि अवसंरचना पर योजनाएँ लागू की गईं।

युवाओं के लिए कौशल विकास, स्टार्टअप, मुद्रा ऋण और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर जोर दिया गया। फिर भी रोजगार की गुणवत्ता और पर्याप्त संख्या में रोजगार पैदा करना लगातार एक महत्वपूर्ण चुनौती बना रहा है। 2024 के चुनाव से पहले किए गए एक Lokniti-CSDS सर्वेक्षण में बेरोजगारी और महँगाई मतदाताओं की प्रमुख चिंताओं में थीं।

 

बड़े और विवादित निर्णय

मोदी सरकार के कुछ फैसलों ने देश की दिशा पर गहरा प्रभाव डाला—2016 की नोटबंदी, GST, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधानों का हटना, नागरिकता संशोधन कानून, तीन नए आपराधिक कानून, अग्निपथ योजना और कृषि कानून इनमें प्रमुख हैं।

नोटबंदी और कुछ अन्य सुधारों के समर्थकों ने इन्हें औपचारिक अर्थव्यवस्था, कर अनुपालन और भ्रष्टाचार के विरुद्ध कदम बताया, जबकि आलोचकों ने इनके तत्काल आर्थिक और सामाजिक प्रभावों पर सवाल उठाए।

तीन कृषि कानूनों को किसानों के विरोध के बाद 2021 में वापस लेना पड़ा। यह मोदी सरकार के कार्यकाल का ऐसा उदाहरण है जिसमें सरकार ने बड़े सुधार का प्रयास किया, लेकिन व्यापक विरोध के बाद नीति वापस ली।

 

विदेश नीति और भारत की वैश्विक भूमिका

मोदी के 25 वर्षों की एक प्रमुख विशेषता विदेश नीति भी रही है। अमेरिका, रूस, यूरोप, जापान, ऑस्ट्रेलिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका के साथ भारत के संबंधों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया गया। QUAD, BRICS, G20 और International Solar Alliance जैसे मंचों पर भारत की सक्रियता बढ़ी।

2015 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया जाना भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का उल्लेखनीय उदाहरण रहा। G20 की 2023 की भारतीय अध्यक्षता और दिल्ली घोषणा ने भी भारत की वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता को प्रमुखता दी।

 

राष्ट्रीय सुरक्षा

2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा मोदी सरकार के राजनीतिक विमर्श का केंद्रीय विषय बनी। रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता, सीमा अवसंरचना और सैन्य आधुनिकीकरण पर भी जोर दिया गया।

इसी दौर में जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया। समर्थक इसे राष्ट्रीय एकीकरण और सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानते हैं, जबकि आलोचक इसके राजनीतिक, संवैधानिक और मानवाधिकार संबंधी प्रभावों पर प्रश्न उठाते रहे हैं।

 

कोविड-19: सबसे कठिन परीक्षा

2020 में कोरोना महामारी मोदी सरकार के सामने सबसे बड़ी प्रशासनिक चुनौतियों में से एक बनी। देशव्यापी लॉकडाउन, मुफ्त खाद्यान्न, आर्थिक पैकेज, स्वास्थ्य ढाँचे का विस्तार और दुनिया के सबसे बड़े कोविड टीकाकरण अभियानों में से एक चलाया गया।

दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन, अस्पतालों और दवाओं की कमी ने सरकार की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए। इसके साथ ही लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों की कठिनाइयों ने भी सरकार की नीतियों की आलोचना को जन्म दिया।

 

नरेंद्र मोदी की Strength

मोदी की सार्वजनिक कार्यशैली की प्रमुख ताकतों में निर्णय लेने की क्षमता, स्पष्ट राजनीतिक संदेश, लंबे समय तक लक्ष्य पर टिके रहने की शैली, बड़े कार्यक्रमों को जन-अभियान में बदलने की क्षमता और सीधे जनता से संवाद प्रमुख हैं।

सोशल मीडिया, रेडियो के मन की बात, प्रत्यक्ष संवाद और बड़े जन-अभियानों के माध्यम से उन्होंने प्रधानमंत्री और जनता के बीच संवाद का एक अलग मॉडल विकसित किया। उनकी संगठनात्मक पकड़ और चुनावी संचार क्षमता भी भारतीय राजनीति में उल्लेखनीय रही है।

उनकी दूसरी महत्वपूर्ण विशेषता बड़े लक्ष्य निर्धारित करने की प्रवृत्ति है—स्वच्छ भारत से लेकर डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत तक।

 

नरेंद्र मोदी की Weakness और प्रमुख आलोचनाएँ

उनके शासन की सबसे बड़ी आलोचनाओं में रोजगार, महँगाई और आर्थिक असमानता, विशेषकर युवाओं के लिए पर्याप्त गुणवत्तापूर्ण रोजगार का प्रश्न शामिल है। 2024 के चुनाव के दौरान Reuters ने भी बेरोजगारी और ग्रामीण आय तथा महँगाई से जुड़ी चिंताओं को प्रमुख मुद्दों के रूप में दर्ज किया था।

दूसरी आलोचना सत्ता के अत्यधिक केंद्रीकरण को लेकर है। आलोचकों का कहना है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय नेतृत्व के आसपास अधिक केंद्रित हुई है।

तीसरी चिंता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अल्पसंख्यकों की स्थिति और संस्थागत स्वतंत्रता को लेकर है। Human Rights Watch ने 2024 की घटनाओं पर अपनी रिपोर्ट में सरकार की आलोचना करने वालों पर कार्रवाई, अल्पसंख्यक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर चिंताएँ दर्ज की हैं। सरकार और उसके समर्थक ऐसी आलोचनाओं को खारिज करते रहे हैं तथा कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर सरकारी कार्रवाइयों का बचाव करते हैं।

 

25 वर्षों का निष्कर्ष

नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष केवल एक व्यक्ति की राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति और शासन व्यवस्था में आए बड़े बदलावों की कहानी भी हैं।

इन 25 वर्षों में गुजरात के पुनर्निर्माण से लेकर डिजिटल भारत, जनधन, स्वच्छ भारत, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, GST, आत्मनिर्भर भारत, आधारभूत संरचना, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति तक अनेक बड़े प्रयोग हुए।

लेकिन किसी भी लंबे सार्वजनिक जीवन का मूल्यांकन केवल उपलब्धियों से नहीं हो सकता। रोजगार, महँगाई, सामाजिक सौहार्द, संस्थागत संतुलन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विकास के समान वितरण जैसे प्रश्न भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

इसलिए नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों की कहानी को न तो केवल उपलब्धियों की सूची कहा जा सकता है और न केवल आलोचनाओं का दस्तावेज। यह ऐसे नेतृत्व की कहानी है जिसने भारत की राजनीति, प्रशासन और सार्वजनिक विमर्श को गहराई से प्रभावित किया है—और जिसके अंतिम मूल्यांकन का अधिकार इतिहास और भारत की जनता के पास है।

*****