बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण में साफ-सुथरी छवि की बात करने वाले राजनीतिक दलों के दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। चुनावी सुधारों पर काम करने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि दूसरे चरण में खड़े 1297 उम्मीदवारों में से 415 ने खुद अपने ऊपर आपराधिक मामले घोषित किए हैं। इनमें से 341 उम्मीदवार गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक इस बार भी चुनावी मैदान में दागी और दौलतमंद उम्मीदवारों की लंबी फेहरिस्त देखने को मिल रही है। दिलचस्प यह है कि स्वच्छ राजनीति और पारदर्शिता की बात करने वाली जन सुराज पार्टी इस मामले में सबसे आगे निकल गई है।

 

जन सुराज की छवि पर सवाल

एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार, इस चरण में जन सुराज पार्टी के 117 उम्मीदवारों में से 58 यानी 50 प्रतिशत उम्मीदवारों ने अपने ऊपर आपराधिक मामलों की जानकारी दी है। इनमें से कई पर हत्या, हत्या के प्रयास और महिला अपराध जैसे गंभीर आरोप दर्ज हैं।
रिपोर्ट बताती है कि 16 उम्मीदवारों पर हत्या के प्रयास, तीन पर हत्या और नौ उम्मीदवारों पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले दर्ज हैं। यह वही पार्टी है जिसके संस्थापक प्रशांत किशोर ने राजनीति में "मानसिक रूप से ईमानदार और भ्रष्टाचारमुक्त उम्मीदवार" उतारने का दावा किया था।

 

अन्य पार्टियों का रिपोर्ट कार्ड

जन सुराज के बाद आरजेडी, भाजपा, कांग्रेस, जदयू और एलजेपी (रामविलास) के उम्मीदवार भी इस सूची में शामिल हैं।

  • आरजेडी के 70 उम्मीदवारों में से 38 (54%) पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
  • भाजपा के 53 में से 30 (57%) उम्मीदवार इसी श्रेणी में आते हैं।
  • कांग्रेस ने 37 प्रत्याशी उतारे हैं जिनमें 25 (68%) पर आपराधिक मामले लंबित हैं।
  • जदयू के 44 में से 14 (32%) उम्मीदवारों पर आपराधिक पृष्ठभूमि के आरोप हैं।
  • एलजेपी (रामविलास) के 15 उम्मीदवारों में से नौ (60%) पर मामले दर्ज हैं।
  • भाकपा(माले) के 6 में से 5 उम्मीदवार गंभीर मामलों में आरोपी हैं, जो प्रतिशत के हिसाब से सबसे ज्यादा है।

इस रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि 122 सीटों में से 73 सीटों को रेड अलर्ट श्रेणी में रखा गया है। इन सीटों पर कम-से-कम तीन या उससे अधिक उम्मीदवार ऐसे हैं जिन पर आपराधिक मामले चल रहे हैं।

 

हत्या और महिला अपराधों की लंबी सूची

दूसरे चरण के उम्मीदवारों में 19 पर हत्या, 79 पर हत्या के प्रयास और 52 पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले दर्ज हैं। इन 52 में से तीन उम्मीदवारों पर बलात्कार के भी आरोप लगे हैं। जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार इस सूची में शीर्ष पर हैं, जबकि आरजेडी, निर्दलीय और अन्य दलों के कई प्रत्याशी भी गंभीर आरोपों में अदालतों का सामना कर रहे हैं।

 

निर्दलीयों पर भी गंभीर आरोप

रिपोर्ट में बताया गया है कि 33 निर्दलीय उम्मीदवारों पर हत्या के प्रयास, आठ पर हत्या और 18 निर्दलीय उम्मीदवारों पर महिलाओं से जुड़े अपराधों के आरोप दर्ज हैं। यह दर्शाता है कि मुख्यधारा के दल ही नहीं, बल्कि स्वतंत्र उम्मीदवारों में भी बड़ी संख्या में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग चुनाव मैदान में हैं।

 

पैसे वाले उम्मीदवारों का जलवा

एडीआर ने आर्थिक स्थिति का विश्लेषण भी जारी किया है। इसके मुताबिक दूसरे चरण के 1297 उम्मीदवारों में से 562 यानी 43 प्रतिशत करोड़पति हैं। इनकी औसत संपत्ति करोड़ों में है, जो बताती है कि बिहार चुनाव अब सामाजिक प्रतिनिधित्व से अधिक आर्थिक ताकत का खेल बनते जा रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक संपन्न उम्मीदवार लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के हैं, जिनकी औसत संपत्ति करीब 14.98 करोड़ रुपये है। उनके बाद जदयू प्रत्याशियों की औसत संपत्ति 9.18 करोड़ रुपये रही। कांग्रेस के प्रत्याशियों की औसत संपत्ति 7.41 करोड़ रुपये, भाजपा के उम्मीदवारों की 6.40 करोड़ रुपये और आरजेडी के प्रत्याशियों की 6.49 करोड़ रुपये बताई गई है।

जन सुराज पार्टी के प्रत्याशियों की औसत संपत्ति 5.35 करोड़ रुपये है। इसके अलावा, बीएसपी उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 2.33 करोड़, आम आदमी पार्टी की 2.16 करोड़, भाकपा(माले) की 1.29 करोड़ और भाकपा की औसत संपत्ति 4.01 करोड़ रुपये दर्ज की गई है।

 

चुनावी सुधारों की जरूरत पर सवाल

एडीआर की यह रिपोर्ट एक बार फिर भारतीय चुनाव प्रणाली और राजनीतिक संस्कृति पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जिस राज्य से चुनाव सुधार और जन चेतना की कई मिसालें जुड़ी रही हैं, वहां आधे से ज्यादा उम्मीदवार या तो दागी हैं या अमीर। यह स्थिति इस चिंता को और गहरा करती है कि समाजसेवा के नाम पर राजनीति करने वालों की छवि कैसे गिर रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लगातार बढ़ रहे अपराधी और धनवान उम्मीदवारों का प्रभुत्व लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरनाक संकेत है। स्वच्छ राजनीति की बात करने वाली हर पार्टी अपने बयानों और व्यवहार के बीच विरोधाभास का उदाहरण पेश कर रही है।

जन सुराज पार्टी का मामला इसका ताजा उदाहरण है, जिसने “ईमानदार राजनीति” की मुहिम के साथ जनता में जगह बनाई, लेकिन अब उसी पर सबसे अधिक दागी उम्मीदवार उतारने का आरोप लग रहा है।

 

जनता के सामने कठिन विकल्प

दूसरे चरण की 73 रेड अलर्ट सीटों की तस्वीर बताती है कि मतदाता के सामने इस बार उम्मीदवार चयन में कठिन विकल्प होंगे। एक तरफ वो राजनीतिक दल हैं जो विकास और सुधार की बात करते हैं, और दूसरी तरफ वही उम्मीदवार हैं जिन पर गम्भीर अपराधों के मामले दर्ज हैं।

इस रिपोर्ट ने बिहार चुनाव 2025 के दूसरे चरण की तस्वीर साफ कर दी है—चमकदार प्रचार के पीछे दागदार हकीकत छिपी है। अब देखना यह है कि जनता इस आंकड़े का कितना असर मतदान में दिखाती है।