अमेरिका की ईरान को सख्त चेतावनी,
होर्मुज़ स्ट्रेट पर आज अहम बातचीत
पूर्णिया/वाशिंगटन: मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव
बढ़ता दिखाई दे रहा है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल
होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान आमने-सामने हैं। हालांकि दोनों देशों
ने बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है, लेकिन अमेरिका ने ईरान के सामने कुछ स्पष्ट
शर्तें रख दी हैं।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार,
ईरान को सार्वजनिक रूप से यह घोषणा करनी होगी कि होर्मुज़ स्ट्रेट पूरी तरह खुला और
सुरक्षित है। इसके साथ ही उसे यह भी भरोसा देना होगा कि अब किसी भी वाणिज्यिक यानी
कॉमर्शियल जहाज़ पर गोलीबारी नहीं होगी। अमेरिका का कहना है कि यदि ईरान ऐसा नहीं करता,
तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों
में दावा किया गया है कि ईरान ने निजी बातचीत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकारों
से यह स्वीकार किया है कि हाल के दिनों में कॉमर्शियल जहाज़ों पर हुई गोलीबारी एक गलती
थी। हालांकि ईरान ने इस घटना की जिम्मेदारी सीधे अपनी सरकार पर नहीं ली है। उसका कहना
है कि यह कार्रवाई उसके भीतर सक्रिय एक कट्टरपंथी और "बेकाबू" समूह ने की,
जो सरकार के पूर्ण नियंत्रण में नहीं है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार,
ईरान ने बातचीत के दौरान यह संदेश दिया कि वह वार्ता को आगे बढ़ाना चाहता है और हाल
की घटनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण मानता है। इसके बावजूद व्हाइट हाउस का रुख बेहद सख्त बना
हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान केवल निजी तौर पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के सामने
अपनी गलती स्वीकार करे और जहाज़ों की सुरक्षा की सार्वजनिक गारंटी दे।
व्हाइट हाउस ने इस सप्ताह होर्मुज़
स्ट्रेट में हुई घटनाओं को युद्धविराम का उल्लंघन माना है। गौरतलब है कि जून महीने
में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत ईरान ने यह
आश्वासन दिया था कि वह अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाज़ों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराएगा
और समुद्री व्यापार में किसी प्रकार की बाधा नहीं डालेगा।
अब शनिवार को ओमान में दोनों
देशों के बीच नई वार्ता होने जा रही है। इस बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस,
विदेश मंत्री मार्को रुबियो, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद
जेरेड कुशनर के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि यह बैठक आने
वाले दिनों में पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा
सकती है।
इधर क़तर का एक प्रतिनिधिमंडल
भी ईरान पहुंच चुका है। उसका उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करना और होर्मुज़
स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाज़ों की आवाजाही को सामान्य बनाना है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राष्ट्रपति
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान ने अमेरिका
से बातचीत जारी रखने का अनुरोध किया है और अमेरिका इसके लिए तैयार हो गया है। हालांकि
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका ने ईरान को साफ शब्दों में बता दिया है कि पहले
वाला युद्धविराम अब समाप्त माना जाएगा और आगे की प्रक्रिया नई शर्तों के आधार पर चलेगी।
इस सप्ताह की शुरुआत में समुद्री
क्षेत्र में हुई झड़पों के दौरान तीन वाणिज्यिक जहाज़ निशाना बने थे। इसके बाद वैश्विक
बाजारों में भी चिंता बढ़ गई थी क्योंकि दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी
समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। हालांकि शुक्रवार को किसी नए हमले की सूचना नहीं
मिली, जिससे यह उम्मीद जगी है कि बातचीत के जरिए हालात सामान्य हो सकते हैं।
इस बीच होर्मुज़ स्ट्रेट के भविष्य
को लेकर भी नई चर्चा शुरू हो गई है। पिछले महीने अमेरिका और ईरान के बीच 14 बिंदुओं
वाले एक समझौता ज्ञापन पर सहमति बनी थी। इसके तहत ईरान, ओमान और अन्य खाड़ी देशों के
साथ मिलकर इस समुद्री मार्ग के प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर काम करेगा।
ईरान पहले ही "पर्शियन गल्फ
स्ट्रेट अथॉरिटी" नामक संस्था बनाने की घोषणा कर चुका है। उसका दावा है कि यह
संस्था जहाज़ों को सुरक्षित आवाजाही के लिए परमिट जारी करेगी। कुछ रिपोर्टों के अनुसार
भविष्य में इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाज़ों से सेवा शुल्क लेने का प्रस्ताव भी विचाराधीन
है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर शनिवार
को ओमान में होने वाली वार्ता पर टिकी हुई है। यदि बातचीत सफल रहती है तो वैश्विक व्यापार
और तेल आपूर्ति को राहत मिल सकती है। लेकिन यदि मतभेद बढ़ते हैं तो इसका असर केवल मध्य
पूर्व ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
विश्लेषण
होर्मुज़ स्ट्रेट केवल अमेरिका और ईरान के बीच विवाद का विषय नहीं है, बल्कि यह पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है। दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। इसलिए यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव सीधे कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग लागत और वैश्विक महंगाई को प्रभावित कर सकता है।
अमेरिका की रणनीति स्पष्ट है कि वह ईरान से सार्वजनिक आश्वासन लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार का विश्वास बहाल करना चाहता है। वहीं ईरान अपनी क्षेत्रीय भूमिका और संप्रभुता को कमजोर नहीं होने देना चाहता। यदि ओमान में होने वाली वार्ता सकारात्मक रहती है तो तनाव कम हो सकता है। लेकिन यदि दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े रहे, तो एक छोटी समुद्री घटना भी बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकती है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन मध्य पूर्व ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे।
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