पटना: बिहार सरकार ने छात्रों को राहत देने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को घोषणा की कि अब बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड (SCC) योजना के तहत मिलने वाले शिक्षा ऋण पूरी तरह से ब्याज-मुक्त होंगे। इसका सीधा लाभ उन लाखों छात्रों को मिलेगा जो उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए आर्थिक रूप से सक्षम नहीं होते और कर्ज लेने से हिचकते हैं।

 

योजना की पृष्ठभूमि

स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत बिहार सरकार ने अक्टूबर 2016 में की थी। इसका मकसद राज्य के हर योग्य छात्र को उच्च शिक्षा तक पहुँच दिलाना था। योजना के तहत इंटर पास छात्र 4 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण प्राप्त कर सकते हैं। यह राशि देश और विदेश दोनों जगह उच्च शिक्षा, प्रोफेशनल कोर्स, तकनीकी शिक्षा और मैनेजमेंट स्टडीज के लिए ली जा सकती है।

 

पहले इस योजना में सरकार छात्रों को 4% तक की ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराती थी। जबकि दिव्यांग, ट्रांसजेंडर और महिलाओं के लिए यह दर 1% तय की गई थी। अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की है कि सभी श्रेणियों के छात्रों के लिए यह ऋण पूरी तरह से ब्याज-मुक्त होगा।

 

मुख्यमंत्री का बयान

पटना स्थित संवाद भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा –

“बिहार का कोई भी छात्र केवल पैसों की कमी की वजह से पढ़ाई से वंचित नहीं रहेगा। अब स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत शिक्षा ऋण पर कोई ब्याज नहीं लगेगा। पूरा ब्याज राज्य सरकार वहन करेगी। छात्रों को सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देना है।”

नीतीश कुमार ने आगे कहा कि उनकी सरकार की प्राथमिकता युवाओं को शिक्षित बनाना और रोजगार के अवसर दिलाना है। उन्होंने यह भी बताया कि इस योजना के तहत पहले ही लाखों छात्रों को फायदा मिल चुका है और अब ब्याज-मुक्त होने से इसका दायरा और बढ़ेगा।

 

छात्रों और अभिभावकों में खुशी

सरकार के इस फैसले से छात्रों और अभिभावकों में उत्साह है। राजधानी पटना के एक छात्र ने कहा –

“हम जैसे मध्यमवर्गीय परिवार के लिए उच्च शिक्षा लेना आसान नहीं होता। फीस ज्यादा होने पर हमें अक्सर कर्ज लेना पड़ता है। अब जब यह ब्याज-मुक्त हो गया है, तो पढ़ाई का बोझ हल्का होगा।”

वहीं पूर्णिया जिले के एक किसान पिता ने कहा कि वे अपने बेटे को इंजीनियरिंग की पढ़ाई करवाना चाहते थे, लेकिन ब्याज की वजह से डर था। अब उन्हें राहत मिली है।

 

शिक्षा जगत की प्रतिक्रिया

शिक्षा विशेषज्ञों ने इसे बिहार में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने वाला बड़ा कदम बताया है। पटना विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने कहा –

“यह निर्णय उन छात्रों के लिए क्रांतिकारी साबित होगा जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है। खासकर ग्रामीण इलाकों के छात्र अब बिना झिझक इस योजना का लाभ उठा पाएंगे।”

 

रोजगार और पलायन पर असर

बिहार में लंबे समय से यह समस्या रही है कि छात्र उच्च शिक्षा और रोजगार की तलाश में बाहर जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज-मुक्त ऋण मिलने से बड़ी संख्या में छात्र राज्य के भीतर और बाहर दोनों जगह पढ़ाई कर सकेंगे। इससे पलायन की प्रवृत्ति थोड़ी कम होगी और पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार हासिल करने में आसानी होगी।

 

आंकड़ों की नजर से

  • 2016 से अब तक 5 लाख से अधिक छात्रों ने इस योजना के तहत आवेदन किया है।
  • इनमें से लगभग 3 लाख छात्रों को अब तक ऋण स्वीकृत किया गया है।
  • इंजीनियरिंग, मेडिकल, प्रबंधन और सामान्य डिग्री कोर्स में सबसे ज्यादा छात्र लाभान्वित हुए हैं।
  • ब्याज का बोझ अब पूरी तरह से सरकार पर होगा, जिससे छात्र केवल मूल राशि (principal amount) चुकाएँगे।

 

विपक्ष की प्रतिक्रिया

विपक्षी दलों ने इस निर्णय का स्वागत किया है, लेकिन इसे चुनावी तैयारी भी बताया है। राजद प्रवक्ता ने कहा –

“सरकार ने यह कदम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उठाया है। हालांकि हम छात्रों के लिए इसे सकारात्मक मानते हैं, लेकिन सरकार को यह काम पहले करना चाहिए था।”

वहीं भाजपा नेताओं ने नीतीश सरकार के इस फैसले को “युवाओं के भविष्य की दिशा बदलने वाला कदम” बताया और कहा कि इसका फायदा हर वर्ग को मिलेगा।

 

आने वाले दिनों की चुनौतियाँ

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि योजना को सुचारू रूप से लागू करने की जिम्मेदारी बड़ी होगी।

  • बैंकों और जिला नोडल कार्यालयों पर छात्रों की भीड़ बढ़ेगी।
  • आवेदन प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बनाना सरकार की चुनौती होगी।
  • ऋण वसूली और समय पर भुगतान की प्रक्रिया भी कड़ी करनी होगी।

 

निष्कर्ष

बिहार सरकार का यह कदम निश्चित तौर पर लाखों छात्रों और उनके परिवारों के लिए राहत लेकर आया है। उच्च शिक्षा का सपना देखने वाले युवाओं को अब पैसों की चिंता नहीं करनी होगी। नीतीश सरकार का दावा है कि यह योजना बिहार को शैक्षणिक रूप से सशक्त बनाएगी और आने वाले वर्षों में इसके सकारात्मक परिणाम दिखेंगे।