पूर्णिया: पूर्णिया सिटी–गुलाबबाग रोड स्थित
सहनियाँ चौक पर नगर निगम द्वारा बनाया गया कचरा संग्रह केंद्र इन दिनों चर्चा का विषय
बना हुआ है। यह केंद्र गाँव के बिल्कुल बीचोंबीच स्थित है, जहाँ पूरे शहर से ठोस कचरा
(Solid Waste) लाकर इकट्ठा किया जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस केंद्र के
कारण गाँव के स्वास्थ्य और वातावरण पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
हालाँकि, नगर निगम प्रबंधन का
कहना है कि यहाँ आधुनिक तकनीक के जरिए कचरे का निपटान किया जा रहा है। केंद्र की देखरेख
कर रहे श्री एच. पी. चौधरी का कहना है कि “कचरे पर विशेष केमिकल का छिड़काव
किया जाता है ताकि दुर्गंध न फैले। साथ ही Excavator मशीनों से कचरे को लगातार उलट-पलट
किया जाता है, जिससे मीथेन गैस बनने से रोका जा सके।’’ मीथेन गैस का उत्सर्जन न केवल
पर्यावरण को प्रभावित करता है बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है।
नगर निगम की योजना के अनुसार
इस केंद्र को पूर्ण रूप से सुरक्षित बनाने के लिए चहारदीवारी का काम तेजी से चल रहा
है। साथ ही Waste Segregator Machine भी इंस्टॉल की जा रही है, ताकि अलग-अलग
प्रकार के कचरे को छांटकर उसके उपयोग योग्य स्थानों पर भेजा जा सके।
कचरे के उपयोग की प्रक्रिया:
- कपड़े,
जूते और अन्य ठोस पदार्थ सीमेंट फैक्ट्रियों को भेजे जाएंगे।
- प्लास्टिक
और पॉलीथिन आधारित वस्तुएँ पावर सेंटर भेजी जाएंगी, जहाँ उनका इस्तेमाल बिजली
उत्पादन में होगा।
- सड़ने-गलने
वाले जैविक कचरे से कम्पोस्ट तैयार किया जाएगा, जिसे किसान ऑर्गेनिक खाद के रूप
में खरीद सकेंगे।
यह मॉडल स्वच्छ भारत मिशन और
कचरे से ऊर्जा उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यही कारण है कि
इतनी बड़ी मात्रा में कचरा जमा होने के बावजूद केंद्र पर दुर्गंध की स्थिति अपेक्षाकृत
कम दिखाई देती है।
लेकिन, स्थानीय लोग आशंकित हैं
कि यह स्थिति केवल गर्मियों तक ही सीमित है। उनका कहना है कि बरसात के मौसम में जब
कचरा सड़ेगा, तब दुर्गंध और प्रदूषण का स्तर बढ़ जाएगा। इसका सीधा असर आसपास के घरों
और गाँव में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा।
स्थानीय निवासियों की मांग:
ग्रामीणों का कहना है कि चाहे प्रबंधन कितना ही आधुनिक क्यों न हो, इस तरह का कचरा
संग्रह केंद्र गाँव या रिहायशी इलाके के बीच में नहीं होना चाहिए। उनका मानना है कि
कचरा केंद्र शहर के बाहर बने, ताकि आम लोगों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर पर इसका असर
न पड़े।
कुल मिलाकर, सहनियाँ चौक का यह
कचरा संग्रह केंद्र स्वच्छता और पर्यावरण संतुलन की नई राह खोलने का प्रयास
है, लेकिन सवाल अब भी बरकरार है—क्या यह गाँव के बीच में होना चाहिए या इसे शहर के
बाहर स्थानांतरित किया जाना चाहिए?
वीडियो देखने के लिए लिंक पर
क्लिक करें: https://youtu.be/4EPIx0_5ZKk



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