नई दिल्ली: संसद का बहुप्रतीक्षित शीतकालीन
सत्र 1 दिसंबर को हंगामे के साथ शुरू हुआ। पहले ही दिन विपक्ष के जोरदार विरोध के कारण
लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों को दिन भर के लिए स्थगित करना पड़ा। सत्र शुरू होने
से ठीक पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया को संबोधित करते हुए विपक्ष को रचनात्मक
बहस में शामिल होने और संसद को 'ड्रामा' का मंच न बनाने की सलाह दी।
पीएम मोदी का मीडिया
संबोधन
सत्र शुरू होने से पहले पीएम
नरेंद्र मोदी ने कहा कि संसद ड्रामा का मंच नहीं, डिलीवरी का स्थान है; विपक्ष को रणनीति
बदलने की सलाह दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ठीक पहले
मीडिया को संबोधित करते हुए संसद को एक जिम्मेदार मंच बताया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों
में कहा कि संसद नाटक का स्टेज नहीं बल्कि देशहित में ठोस निर्णय लेने वाली जगह
है।
उन्होंने विपक्ष को बार-बार नारेबाजी
छोड़कर रचनात्मक बहस पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। मोदी ने जोर देकर कहा कि राष्ट्र
तेजी से प्रगति कर रहा है और संसद को इस गति को बनाए रखने में सहयोग देना चाहिए। उन्होंने
विपक्ष की पुरानी रणनीति पर कटाक्ष करते हुए सकारात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया।
यह संबोधन विपक्ष के SIR जैसे मुद्दों पर हंगामे की आशंका के बीच आया। सरकार
की प्राथमिकताओं पर फोकस रखते हुए उन्होंने विधेयकों के महत्व को रेखांकित किया। कुल
मिलाकर यह बयान सत्र को सुचारू रूप से चलाने की अपील था, जिसमें विपक्ष को कमजोर करने
की बजाय राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संदेश दिया गया।
विपक्ष की SIR
पर मांग
विपक्ष ने मतदाता सूची के स्पेशल
इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर चर्चा की मांग की, दिल्ली धमाका, प्रदूषण व विदेश नीति पर
भी जोर दिया। विपक्षी दलों ने लोकसभा में SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन अभियान
को लेकर जोरदार हमला बोला। मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों पर तत्काल चर्चा की
मांग की गई। इसके साथ ही, दिल्ली में हुए धमाके, वायु प्रदूषण और विदेश नीति जैसे राष्ट्रीय
मुद्दों को सदन में उठाने का दबाव बनाया।
इंडी गठबंधन की बैठक में SIR
को मुख्य हथियार बनाने का फैसला हुआ। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे वोट
चोरी का षड्यंत्र करार दिया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार चुनावी फायदे के लिए
SIR चला रही है। उन्होंने दिल्ली के हालिया धमाके की जांच और प्रदूषण नियंत्रण पर सवाल
उठाए, साथ ही विदेश नीति में पड़ोसी देशों के साथ तनाव को संसद में लाने की कोशिश की।
हंगामे के कारण सदन स्थगित होने से मांगें अधर में लटक गईं। विपक्ष आने वाले दिनों
में इन मुद्दों पर आंदोलन तेज करने का संकेत दिया।
लोकसभा में हंगामा
स्पीकर ओम बिरला के आग्रह के
बावजूद विपक्ष के नारे लगाने से सदन दोपहर तक स्थगित; बाद में पूरे दिन के लिए। लोकसभा
में सत्र की पहली ही बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष से शांत
रहने का बार-बार आग्रह किया लेकिन नारेबाजी रुकी नहीं। SIR और अन्य मुद्दों पर नारे
लगते रहे जिससे सदन सुबह से दोपहर तक स्थगित रहा। बाद में पूरे दिन के लिए सदन बंद
कर दिया गया।
विपक्ष के सांसद केंद्रीय गलियारों
में धरना भी देने लगे। स्पीकर ने सदन के नियमों का पालन करने की चेतावनी दी। हंगामा
इतना तीव्र था कि कोई विधायी कार्य नहीं हो सका। बीजेपी ने विपक्ष को संसद को बाधित
करने का आरोप लगाया। कंगना रनौत जैसे सांसदों ने शांति की अपील की। कुल मिलाकर पहला
दिन कार्यवाही रहित रहा। आने वाले दिनों में तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
14 विधेयक सूचीबद्ध
सरकार ने एटॉमिक एनर्जी बिल,
हायर एजुकेशन कमीशन बिल, इंश्योरेंसी अमेंडमेंट समेत 14 विधेयक पेश करने का प्लान बनाया।
सरकार ने शीतकालीन सत्र में 14 महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयार की है। इनमें एटॉमिक
एनर्जी विधेयक, हायर एजुकेशन कमीशन बिल और इंश्योरेंसी अमेंडमेंट बिल प्रमुख हैं। संविधान
के 129वें व 130वें संशोधन बिल भी सूची में शामिल हैं। जन विश्वास बिल और इनसॉल्वेंसी
बिल जैसे कानूनों पर भी फोकस रहेगा।
ये विधेयक ऊर्जा, शिक्षा, वित्त
और प्रशासनिक सुधारों को मजबूत करेंगे। हंगामे के बावजूद सरकार इन्हें पारित कराने
के लिए दृढ़ है। मंत्री किरेन रिजिजू ने सत्र को रचनात्मक बनाने की अपील की। विपक्ष
इन बिलों पर बहस की मांग कर सकता है। सत्र 19 दिसंबर तक चलने से पर्याप्त समय उपलब्ध
है। ये विधेयक देश की आर्थिक व सामाजिक प्रगति को गति देंगे।
दोनों सदन स्थगित
हंगामे के कारण लोकसभा व राज्यसभा
दोनों दिन भर के लिए स्थगित; सत्र 19 दिसंबर तक निर्धारित। विपक्ष के लगातार हंगामे
से लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदन दिन भर के लिए स्थगित हो गए। SIR चर्चा न होने पर
राज्यसभा में वॉकआउट भी हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा अनुमोदित सत्र 1
से 19 दिसंबर तक निर्धारित है। कुल 15 बैठकें प्रस्तावित थीं, लेकिन पहला दिन व्यर्थ
गया।
खरगे ने सरकार पर संसदीय मर्यादा
तोड़ने का आरोप लगाया। रिजिजू ने मांगों पर विचार जारी रखने का भरोसा दिया। इंडिया
गठबंधन ने हंगामा जारी रखने का फैसला लिया। सत्र में विधेयक पारित करने का लक्ष्य अब
चुनौतीपूर्ण हो गया है। विपक्ष का दबाव रणनीतिक मुद्दों पर केंद्रित है, जबकि सरकार
सुचारू कार्यवाही की उम्मीद जता रही है।
विश्लेषण
लोकसभा का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर
से शुरू हुआ लेकिन विपक्ष के SIR मुद्दे पर हंगामे ने पहला दिन बर्बाद कर दिया। पीएम
मोदी ने मीडिया में संसद को 'ड्रामा का मंच नहीं, डिलीवरी का स्थान' बताते हुए विपक्ष
को रचनात्मक बहस की सलाह दी। विपक्ष ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन
(SIR) पर चर्चा मांगकर दिल्ली धमाका, प्रदूषण व विदेश नीति जैसे मुद्दे जोड़े। स्पीकर
ओम बिरला के आग्रह पर भी नारेबाजी से सदन स्थगित हुआ।
सरकार 14 विधेयकों जैसे एटॉमिक
एनर्जी बिल, हायर एजुकेशन कमीशन बिल पर फोकस कर रही है, लेकिन हंगामा बाधक बन रहा है।
इंडिया गठबंधन की बैठक में आंदोलन तेज करने का फैसला लिया गया। खरगे ने सरकार पर आरोप
लगाए। सत्र 19 दिसंबर तक निर्धारित है और विधेयक पारित करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
यह तनाव लोकतंत्र की मजबूती या अवरोध दर्शाता है। सरकार सुचारू सत्र चाहती है, जबकि
विपक्ष जवाबदेही की मांग कर रहा है।
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