भारत के नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने
पद संभालने के तुरंत बाद देश की न्याय व्यवस्था के सामने मौजूद सबसे बड़ी चुनौती—5.4 करोड़
से अधिक लंबित मामलों—पर खुलकर बात की। शपथ के अगले ही दिन CJI ने
अपने पहले संबोधन में कहा कि यह बैकलॉग किसी एक कारण का परिणाम नहीं है, बल्कि
न्याय प्रणाली में गहरी जड़ें जमाए
संरचनात्मक खामियों का
नतीजा है, जिनके समाधान के लिए सरकार और न्यायपालिका दोनों के संयुक्त
प्रयास की आवश्यकता है।
ट्रायल कोर्ट सबसे अधिक बोझ में—5.4 करोड़ लंबित मामलों का बड़ा हिस्सा:
CJI सूर्यकांत
द्वारा जारी ताज़ा डेटा के मुताबिक:
- ट्रायल
कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या सबसे अधिक है, जो
कुल बैकलॉग का बड़ा हिस्सा हैं।
- उच्च
न्यायालयों में करीब 63.8 लाख मामले लंबित
हैं।
- सुप्रीम
कोर्ट में 90,000 से अधिक मामले सालों
से फैसले की प्रतीक्षा में हैं।
CJI ने
कहा कि ये आंकड़े साफ संकेत हैं कि न्यायपालिका को केवल संख्या बढ़ाने की नहीं, बल्कि वैज्ञानिक
और व्यवस्थित दृष्टि से सुधार की जरूरत है।
बुनियादी ढांचे की कमी—देरी की जड़:
CJI सूर्यकांत
ने देरी की मुख्य वजहों में शामिल किए:
- न्यायिक
इमारतों की कमी
- न्यायालयों
में आधुनिक सुविधाओं का अभाव
- स्टाफ और
संसाधनों की कमी
- राज्यों
द्वारा भूमि आवंटन और निर्माण कार्य में देरी
उन्होंने कहा कि अदालतों के लिए समय पर भूमि की पहचान, निर्माण
कार्य का तेज़ निष्पादन और तकनीकी रूप से सक्षम ढांचे की उपलब्धता न्याय
वितरण की गति को कई गुना बढ़ा सकती है।
उनके अनुसार, न्यायपालिका केवल जजों की कमी से नहीं जूझ रही, बल्कि भौतिक
और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी
समान रूप से बड़ी चुनौती है।
वैकल्पिक विवाद समाधान होगा ‘गेम चेंजर’:
CJI ने ADR
(Alternative Dispute Resolution)—जैसे मध्यस्थता, सुलह, लोक अदालत—को आने वाले वर्षों में
न्यायपालिका के लिए बड़ा सहारा बताया।
उनका कहना है कि यदि अधिकांश छोटे, पारिवारिक, व्यावसायिक
और सिविल विवाद मध्यस्थता से हल हो जाएं, तो कोर्ट पर दबाव काफी कम होगा।
उन्होंने ADR को “भविष्य का गेम चेंजर” बताया।
7 और 9 जजों
की संविधान पीठ—हजारों मामलों का रास्ता साफ करेगी:
CJI सूर्यकांत
ने कहा कि कई अहम कानूनी प्रश्न वर्षों से लंबित हैं। इन संवैधानिक प्रश्नों के
समाधान के लिए Supreme Court में 7 और 9
जजों वाली बड़ी पीठों का
गठन किया जाएगा।
उनका तर्क है कि:
- जब मूल
कानूनी प्रश्नों पर बड़ा फैसला आ जाएगा,
- तो उससे
जुड़े सैकड़ों-हजारों मामले स्वतः निपट जाएंगे।
यह कदम बैकलॉग कम करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट बनाम हाईकोर्ट—CJI ने दूर की गलतफहमी:
पिछले कुछ वर्षों में उच्च न्यायालयों के कुछ न्यायाधीशों द्वारा
सुप्रीम कोर्ट के ‘बड़ा भाई’ रवैये पर अप्रसन्नता जताई गई थी।
इस पर CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया:
- SC और HC का संबंध
प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि संवैधानिक पूरकता का है।
- दोनों
संस्थाएं अलग-अलग जिम्मेदारियाँ निभाती हैं, लेकिन उद्देश्य एक ही है—न्याय।
उन्होंने बताया कि:
- अनुच्छेद
225 के तहत हाईकोर्ट का अधिकार क्षेत्र कई
मायनों में SC की तुलना में अधिक व्यापक है।
- हाईकोर्ट
जनता के सबसे करीब हैं और क्षेत्रीय मुद्दों की समझ उनमें सबसे अधिक है।
“पहले
हाईकोर्ट जाएं”—याचिकाकर्ताओं को सीजेआई की सलाह:
CJI सूर्यकांत
ने यह भी कहा कि पार्टी, संगठन और व्यक्ति अक्सर सीधे सुप्रीम कोर्ट
पहुंच जाते हैं, जबकि कई मामलों का समाधान हाईकोर्ट में ही संभव है।
उन्होंने स्पष्ट सलाह दी:
“सुप्रीम कोर्ट आने से पहले अपना मामला
हाईकोर्ट में जरूर रखें।”
इससे SC पर अनावश्यक बोझ कम होगा और न्यायिक प्रक्रिया
और सहज बनेगी।
महिलाओं और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर फोकस:
CJI ने
यह स्वीकार किया कि वे दो संवेदनशील मुद्दों पर विशेष रूप से काम कर रहे हैं—
1.
सुप्रीम
कोर्ट और हाईकोर्ट में महिलाओं की संख्या बढ़ाना
2.
देश
के सभी क्षेत्रों से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना
उनका कहना है कि न्यायपालिका में विविधता बढ़ने से ही लोग न्याय
व्यवस्था पर अधिक भरोसा करेंगे।
कॉलेजियम की सिफारिशों पर सरकार की देरी—CJI की नाराज़गी साफ:
CJI सूर्यकांत
ने यह मुद्दा उठाया कि कई बार सरकार कॉलेजियम की सिफारिशों को चुनकर लागू करती है, जिससे:
- नियुक्तियाँ
लटक जाती हैं
- कोर्ट में
जजों की कमी बनी रहती है
उन्होंने इस पर शीघ्र समाधान की
उम्मीद जताई।
निष्कर्ष:
CJI सूर्यकांत
का पूरा वक्तव्य स्पष्ट करता है कि आने वाले समय में भारतीय न्यायपालिका में:
- बड़े
पैमाने पर संरचनात्मक सुधार
- इंफ्रास्ट्रक्चर
का आधुनिकीकरण
- तेजी
से नियुक्तियाँ
- संविधान
पीठों का गठन
- और ADR
को बढ़ावा
जैसे बड़े कदम देखने को मिल सकते हैं।
उनका संदेश साफ है—
“न्याय व्यवस्था में बदलाव केवल जजों की
संख्या बढ़ाने से नहीं, बल्कि पूरी प्रणाली के वैज्ञानिक पुनर्गठन से
होगा।”



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