नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के ग्रेटर कैलाश क्षेत्र में बुधवार रात एक विवाह समारोह के दौरान जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और Jammu & Kashmir National Conference के अध्यक्ष Farooq Abdullah पर गोली चलाने की कोशिश की गई। हालांकि, मौके पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों की त्वरित कार्रवाई के कारण यह हमला विफल हो गया और फारूक अब्दुल्ला बाल-बाल बच गए। इस घटना में गोली के छर्रे लगने से जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary को हल्की चोट आई है।

पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने मौके से हमलावर को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित की पहचान 63 वर्षीय कमल सिंह जम्वाल के रूप में हुई है। उसके पास से लाइसेंसी हथियार भी बरामद किया गया है। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें हमलावर पीछे से आकर फारूक अब्दुल्ला पर गोली चलाने का प्रयास करता दिखाई दे रहा है।

 

विवाह समारोह में हुई घटना

जानकारी के अनुसार यह घटना उस समय हुई जब फारूक अब्दुल्ला दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित रायल पार्क बैंक्वेट हॉल में एक वरिष्ठ वकील की बेटी के विवाह समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। इस समारोह में उनके साथ उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार Nasir Aslam Wani भी मौजूद थे।

बताया जाता है कि समारोह के दौरान आरोपी कमल सिंह जम्वाल अचानक पीछे से आया और अपने लाइसेंसी हथियार से फारूक अब्दुल्ला को निशाना बनाने की कोशिश की। हालांकि, फारूक अब्दुल्ला को पहले से ही Z+ श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है, जिसके कारण उनके सुरक्षा कर्मी सतर्क थे।

जैसे ही हमलावर ने गोली चलाने की कोशिश की, सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए उसे धक्का देकर काबू करने का प्रयास किया। इसी दौरान एक गोली चल गई, जिसके छर्रे उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी को लग गए।

 

उपमुख्यमंत्री को हल्की चोट

घटना के तुरंत बाद मौके पर मौजूद चिकित्सकों और सुरक्षा कर्मियों ने सुरिंदर चौधरी को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया। अधिकारियों के अनुसार उन्हें केवल मामूली चोट आई है और उनकी स्थिति पूरी तरह से सामान्य है।

घटना के कुछ समय बाद सुरिंदर चौधरी मीडिया के सामने आए और उन्होंने कहा,
“मैं बिल्कुल ठीक हूं। फारूक साहब और नासिर असलम वानी भी सुरक्षित हैं।”

हालांकि उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता भी व्यक्त की। उनका कहना था कि सभी को पता था कि फारूक अब्दुल्ला आतंकियों के निशाने पर रहे हैं, इसके बावजूद कार्यक्रम स्थल पर पर्याप्त पुलिस सुरक्षा की व्यवस्था नहीं की गई थी।

 

समारोह में मची अफरातफरी

गोली चलने की आवाज सुनते ही विवाह समारोह में कुछ समय के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया। कार्यक्रम में मौजूद लोग घबरा गए और सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत स्थिति को नियंत्रित किया।

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार आरोपी समारोह के प्रवेश द्वार के आसपास खड़ा था और मौके का इंतजार कर रहा था। जैसे ही फारूक अब्दुल्ला वहां पहुंचे, वह पीछे से उनके करीब आया और हमला करने की कोशिश की।

हालांकि सुरक्षा कर्मियों की तत्परता के कारण वह अपने इरादे में सफल नहीं हो पाया।

 

पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार

घटना के तुरंत बाद पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने आरोपी को काबू कर लिया और उसका हथियार भी बरामद कर लिया। मामले की जांच की जा रही है।

इस संबंध में जम्मू दक्षिण के पुलिस अधीक्षक Ajay Sharma ने इंटरनेट मीडिया पर जारी बयान में बताया कि फारूक अब्दुल्ला पूरी तरह सुरक्षित हैं और आरोपी को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ की जा रही है।

उन्होंने बताया कि आरोपी जम्मू शहर के पुरानी मंडी इलाके का निवासी है और उसके इरादों तथा पृष्ठभूमि की जांच की जा रही है।

 

आरोपी ने कबूला पुराना इरादा

पुलिस सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी कमल सिंह जम्वाल ने यह स्वीकार किया है कि वह पिछले लगभग 20 वर्षों से फारूक अब्दुल्ला को मारने की योजना बना रहा था।

हालांकि उसने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि उसके मन में इतनी लंबी अवधि से यह नफरत या हत्या का इरादा क्यों था।

सूत्रों का कहना है कि आरोपी को बुधवार को विवाह समारोह में फारूक अब्दुल्ला को निशाना बनाने का अवसर मिला, लेकिन सुरक्षा कर्मियों की सतर्कता के कारण वह अपने मकसद में सफल नहीं हो पाया।

 

सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी ने यह हमला अकेले किया या इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क या साजिश की भूमिका हो सकती है।

इसके अलावा कार्यक्रम स्थल की सुरक्षा व्यवस्था और वहां मौजूद पुलिस की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

 

विश्लेषण

फारूक अब्दुल्ला जैसे वरिष्ठ राजनीतिक नेता पर सार्वजनिक कार्यक्रम में हमला करने की कोशिश सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। खासकर तब, जब संबंधित नेता को पहले से Z+ श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त हो।

इस घटना ने यह भी दिखाया कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों में वीआईपी सुरक्षा कितनी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। विवाह समारोह जैसे निजी कार्यक्रमों में अक्सर सुरक्षा व्यवस्था अपेक्षाकृत ढीली हो जाती है, जिसका फायदा हमलावर उठाने की कोशिश कर सकते हैं।

हालांकि इस मामले में सुरक्षा कर्मियों की त्वरित प्रतिक्रिया ने संभावित बड़ी घटना को टाल दिया। यह सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता का उदाहरण भी है।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह घटना महत्वपूर्ण है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर की राजनीति लंबे समय से संवेदनशील रही है और वहां के प्रमुख नेताओं पर पहले भी हमले की आशंका जताई जाती रही है।

अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आरोपी ने अकेले यह कदम उठाया या इसके पीछे कोई व्यापक साजिश है। आने वाली जांच से ही इस घटना के वास्तविक कारणों और पृष्ठभूमि का पता चल सकेगा।