बरौनी: बिहार
के बेगूसराय जिले में स्थित बरौनी जंक्शन पर 30 दिसंबर 2025 को एक बड़ा रेल हादसा हो गया। एक मालगाड़ी के आठ डिब्बे पटरी से उतर गए,
जिससे रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हो गया। यह घटना दोपहर करीब 1
बजे के आसपास घटी, जब मालगाड़ी तेज रफ्तार से
चल रही थी।
हादसे की सूचना
मिलते ही रेलवे प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू कर
दिया। सौभाग्य से इस दुर्घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, क्योंकि यह मालगाड़ी थी और उसमें कोई यात्री नहीं था। फिर भी, पटरी से उतरे डिब्बों के कारण ट्रैक पर मलबा बिखर गया, जिससे ट्रेनों का संचालन ठप हो गया। रेलवे के अधिकारियों ने तत्काल बहाली
कार्य प्रारंभ कर दिया, जिसमें क्रेन और मरम्मत दल लगाए गए।
हादसे
का विवरण
बरौनी जंक्शन
बिहार का एक महत्वपूर्ण रेल केंद्र है, जो
मुजफ्फरपुर-कोलकाता मुख्य लाइन पर स्थित है। यह जंक्शन प्रतिदिन सैकड़ों ट्रेनों
का आवागमन देखता है। मंगलवार को चली इस मालगाड़ी का नंबर 13241 था, जो कोयला लादकर बरौनी से आगे जा रही थी। अचानक
पटरी नंबर 3 पर पहुंचते ही लोको पायलट ने ब्रेक लगाए,
लेकिन आठ डिब्बे अनियंत्रित होकर पटरी से फिसल गए।
प्रत्यक्षदर्शियों
के अनुसार, हादसे से पहले ट्रेन की आवाज असामान्य थी। कुछ ने
बताया कि पटरी पर दोष या डिब्बों की चेन टूटने से यह घटना हुई। रेलवे के पीआरओ ने
बताया कि प्रारंभिक जांच में तकनीकी खराबी का पता चला है। डिब्बे पटरी से उतरते ही
धुंधला धुआं उठा और जोरदार धमाका हुआ, जिससे आसपास के लोग
दहशत में आ गए। स्थानीय लोग तुरंत सहायता के लिए पहुंचे।
रेलवे ने हादसे
के बाद सभी ट्रेनों को डायवर्ट कर दिया। मुजफ्फरपुर-हावड़ा, दरभंगा-पटना समेत कई प्रमुख ट्रेनें प्रभावित हुईं। यात्रियों को वैकल्पिक
बसें उपलब्ध कराई गईं। बरौनी स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई, क्योंकि
कई ट्रेनें प्लेटफॉर्म पर खड़ी रहीं। रेल मंत्री ने भी इसकी जानकारी ली और उच्च
स्तरीय जांच के आदेश दिए।
बहाली
कार्य की प्रगति
बहाली कार्य में
रेलवे ने भारी मशीनरी तैनात की। दो बड़ी क्रेनें मलबा हटाने में जुटी रहीं।
इंजीनियरों का एक दल पटरी की मरम्मत कर रहा था। शाम 3 बजे तक चार डिब्बे हटाए जा चुके थे, लेकिन शेष चार
अभी भी बाधा बने हुए थे। रेलवे अधिकारियों का अनुमान है कि रात तक ट्रैक बहाल हो
जाएगा।
इस दौरान बरौनी
रिफाइनरी के कर्मचारी भी सहायता के लिए पहुंचे, क्योंकि जंक्शन उनके
क्षेत्र के निकट है। एनडीआरएफ की एक टीम भी अलर्ट पर रही। बेगूसराय एसपी ने
सुरक्षा का भरोसा दिया और ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात किया।
स्थानीय विधायक ने भी मौके का दौरा किया।
पिछले कुछ
महीनों में बिहार में रेल हादसों की संख्या बढ़ी है। जमुई में हाल ही में हुए
ट्रेन हादसे की यादें ताजा हो गईं, जहां सात ट्रेनें
रद्द हुई थीं। रेलवे ने पटरी की मजबूती जांचने के लिए विशेष टीम भेजी है।
प्रभावित
ट्रेनें और यात्रियों की परेशानी
हादसे से कम से
कम 12 ट्रेनें प्रभावित हुईं। इनमें हावड़ा-अमृतसर मेल, पटना-नई
दिल्ली राजधानी शामिल हैं। कई ट्रेनें बरौनी से पहले ही रोक दी गईं। पटना और
मुजफ्फरपुर स्टेशनों पर यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ आई। एक यात्री ने बताया,
"हम सपरिवार दिल्ली जा रहे थे, अब बस से
जाना पड़ेगा।" रेलवे ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए: 139 और
1800-111-139।
यात्रियों को
चाय-पानी और भोजन वितरित किया गया। कुछ ट्रेनों को शॉर्ट टर्मिनेट कर दिया गया।
लंबी दूरी की ट्रेनें चार घंटे लेट चल रही हैं। बरौनी के आसपास सड़क यातायात भी
जाम हो गया।
राजनीतिक
प्रतिक्रिया
बिहार के
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हादसे पर शोक व्यक्त किया और रेलवे को त्वरित बहाली के
निर्देश दिए। विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने रेलवे की लापरवाही पर सवाल उठाए।
उन्होंने ट्वीट किया, "बिहार में रेल हादसे क्यों बढ़ रहे हैं?
केंद्र सरकार जिम्मेदार है।" भाजपा ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण
बताया।
संजय सरावगी, नए बिहार भाजपा प्रमुख ने भी बयान जारी किया। स्थानीय सांसद ने संसद में
मामला उठाने की बात कही। यह हादसा चुनावी साल में राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
सुरक्षा
उपाय और भविष्य की चुनौतियां
रेलवे ने जांच
के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की। प्रारंभिक रिपोर्ट में डिब्बों की ओवरलोडिंग और
पुरानी पटरी मुख्य कारण बताए गए। बरौनी जंक्शन पर सिग्नल सिस्टम अपग्रेड की मांग
लंबे समय से है। रेलवे ने वादा किया कि अगले महीने तक आधुनिक सिस्टम लगेगा।
बिहार में सर्दी
और कोहरे के कारण रेल हादसे बढ़ते हैं। यात्रियों से अपील की गई कि 139 पर अपडेट लें। यह घटना रेलवे को सतर्क करती है कि रखरखाव पर ध्यान दें।
निष्कर्ष
बरौनी हादसा
बिहार की रेल व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करता है। बहाली कार्य तेजी से चल रहा
है, लेकिन यात्रियों को अभी परेशानी हो रही। रेलवे को सख्त कदम उठाने होंगे।



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