"ऑपरेशन ब्लू स्टार के बयान ने सुलगाई सियासत: चिदंबरम की टिप्‍पणी पर कांग्रेस में असंतोष, भाजपा का बड़ा हमला"

भारत की सियासत में शनिवार को एक नई बहस छिड़ गई जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणी की। उनके अनुसार, यह सेना द्वारा स्वर्ण मंदिर में घुसकर किया गया गलत ऑपरेशन था, जिसकी भारी कीमत पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। उनकी इस राय से कांग्रेस खुद असहज दिखी, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे मुद्दा बनाकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। इस प्रकरण ने सिर्फ अतीत की राजनैतिक भूलों को फिर से सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है, बल्कि सिख समुदाय और राष्ट्रीय राजनीति के पुराने घावों को फिर से ताजा कर दिया है।

 

चिदंबरम की टिप्पणी: क्या थी मूल बात?

हिमाचल प्रदेश के कसौली में 'खुशवंत सिंह साहित्य महोत्सव 2025' के दौरान, जब पत्रकार हरिंदर बावेजा की किताब 'दे विल शूट यू, मैडम' पर चर्चा हो रही थी, वहीं पी चिदंबरम से 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' पर पूछे सवाल के जवाब में उन्होंने कहा — "1984 में स्वर्ण मंदिर में सेना भेजना गलत तरीका था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की गलती थी, जिसकी कीमत उन्हें अपनी जान गंवाकर चुकानी पड़ी। इसके कुछ साल बाद ऑपरेशन ब्लैक थंडर में हमने दिखाया कि बिना सेना के प्रवेश के भी स्वर्ण मंदिर की स्थिति से निपटना संभव था।"

चिदंबरम ने साफ कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार सेना, पुलिस, खुफिया और प्रशासन का सामूहिक निर्णय था, लेकिन वह सही रणनीति नहीं थी।

 

कांग्रेस अंदरूनी नाराजगी और सार्वजनिक शर्मिंदगी

चिदंबरम के बयान से कांग्रेस में अंदरूनी नाराजगी साफ दिखी। पार्टी नेतृत्व ने माना कि ऐसे संवेदनशील विषयों पर वरिष्ठ नेता को अत्यंत सतर्कता बरतनी चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष ने इस बयान पर असहमति दर्ज कराते हुए इसे पार्टी के लिए सार्वजनिक शर्मिंदगी का विषय बताया। कई नेताओं का कहना है कि इस बयान के कारण पार्टी विरोधियों के लिए हमला करने का एक और मौका बन गया है।

 

भाजपा का हमला: 'कांग्रेस की गलती अब स्वीकार'

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने चिदंबरम के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चिदंबरम कांग्रेस की गलतियों को बहुत देर में स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “पहले चिदंबरम ने माना कि अमेरिका के दबाव में कांग्रेस ने 26/11 के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, अब वह कह रहे हैं कि ऑपरेशन ब्लू स्टार भी एक भूल थी।
रिजिजू ने इसे कांग्रेस की ऐतिहासिक गलतियों की लिस्ट में गिनाते हुए पार्टी की मंशा और नेतृत्व पर भी सवाल उठाया।

 

भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह का आरोप

भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने और भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार कोई अनिवार्यता नहीं थी, बल्कि इंदिरा गांधी की राजनीतिक चूक थी।
उन्होंने आरोप लगाया — “इंदिरा गांधी ने 1984 के चुनाव से पहले सिखों को राष्ट्रविरोधी प्रचारित कर राजनीतिक लाभ लिया। इसका परिणाम दिल्ली और पंजाब सहित देशभर के सिखों को भुगतना पड़ा, उनके खिलाफ हिंसा हुई। यह पूरी तरह से एक सोची-समझी साजिश थी।

 

भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय की टिप्‍पणी

भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी चिदंबरम की टिप्पणी पर राजनीति तेज कर दी। उन्होंने कहा — “कांग्रेस हमेशा इंदिरा और राजीव गांधी को शहीद और समाज का मसीहा बताती रही, लेकिन अब खुद चिदंबरम ने इस मिथक को तोड़ दिया है। यदि इंदिरा गांधी की हत्या उनकी गलतियों का परिणाम थी, तो फिर कांग्रेस चिदंबरम पर क्या कार्रवाई करेगी?”

 

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: ऑपरेशन ब्लू स्टार और ब्लैक थंडर

1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में छिपे आतंकी गुट को बाहर निकालने के लिए इंदिरा गांधी सरकार ने सेना को भेजा था। इस सैन्य कार्रवाई को 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' कहा गया, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए। इससे सिख समुदाय में सरकार के प्रति गहरा आक्रोश पैदा हुआ, जिसकी परिणति इंदिरा गांधी की हत्या और देशभर में सिखों के खिलाफ हुए दंगों में हुई।
बाद में, बिना सीधी सैन्य कार्रवाई के, 'ऑपरेशन ब्लैक थंडर' (1986 एवं 1988) की मिसाल दी जाती है, जिसमें पुलिस नेतृत्व में चरमपंथ का शांतिपूर्ण हल निकाला गया था। चिदंबरम इसी परिप्रेक्ष्य में ब्लू स्टार को 'गलत तरीका' बता रहे हैं।

 

सियासी मायने और आने वाली चुनौती

यह पूरा विवाद भारत की राजनीति में उन भूले-बिसरे सवालों को फिर से जन्म दे रहा है, जिनकी जड़ें गहरी और दर्दनाक हैं। मामला सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं, बल्कि कांग्रेस की सामूहिक छवि के लिए भी एक इम्तिहान है। सिख समुदाय के लिए आज भी ऑपरेशन ब्लू स्टार की स्मृति बेहद संवेदनशील है। ऐसे में वरिष्ठ नेताओं के सार्वजनिक बयान पार्टी की रणनीति और सेक्युलर पहचान, दोनों को प्रभावित कर सकते हैं।

भाजपा इस बेहद भावनात्मक मुद्दे पर कांग्रेस को घेर रही है, ताकि सिख समुदाय समेत अन्य अल्पसंख्यकों के बीच कांग्रेस की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया जा सके। दूसरी ओर कांग्रेस को अनुभवी नेताओं की बयानबाजी के प्रबंधन की चुनौती है, क्योंकि आज के दौर की राजनीति में हर बयान 'वोट' और 'छवि' दोनों पर असर डालता है।

 

निष्कर्ष

पी चिदंबरम के 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' संबंधी बयान ने भारत की राजनीति को एक बार फिर तीखी बहस की ओर मोड़ दिया है। यह विवाद केवल कांग्रेस के भीतर असंतोष और सवालों को जन्म दे रहा है, बल्कि विपक्ष के लिए भी कांग्रेस को घेरने का बहाना बन चुका है। आने वाले दिनों में देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस विवाद से खुद को कैसे बाहर निकालती हैक्या माफी मांगी जाएगी, क्या कोई कार्रवाई होगी, या फिर सब कुछ एक बार फिर राजनीतिक भूले-बिसरे अध्याय में दफन हो जाएगा।