30 अक्टूबर 2026 | पूर्णिया, बिहार | GPNBIHAR न्यूज डेस्क

 

पूर्णिया: शहर की जीवनरेखा कही जाने वाली सौरा नदी आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। कभी पूर्णिया की प्राकृतिक पहचान और पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा रही यह नदी अब कचरे और गंदगी की समस्या से जूझ रही है। नदी के किनारे जमा कचरे का अंबार न केवल पर्यावरण के लिए खतरा बन रहा है, बल्कि आसपास के इलाकों में दुर्गंध और प्रदूषण की समस्या भी बढ़ा रहा है। सौरा नदी को इस बदहाल स्थिति से बाहर निकालने और उसे कचरा मुक्त बनाने की मांग को लेकर अब पूर्णिया के युवाओं ने आंदोलन का रास्ता चुना है। सौरा बचाओ अभियान के तहत युवा 31 अक्टूबर, शनिवार को थाना चौक पर एक दिवसीय भूख हड़ताल करेंगे।

इस संबंध में आज श्री नायक होटल, पूर्णिया में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें समाजसेवी शौर्य राय और पंकज नायक ने संयुक्त रूप से सौरा नदी की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताई और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों समाजसेवियों ने कहा कि सौरा नदी की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। नदी के किनारे जगह-जगह कचरे का ढेर जमा है। इससे नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है और आसपास के वातावरण में प्रदूषण फैल रहा है। उनका कहना था कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

 

प्रशासन और नगर निगम पर उठाए सवाल

शौर्य राय और पंकज नायक ने आरोप लगाया कि सौरा नदी की सफाई और संरक्षण को लेकर कई बार जिला प्रशासन तथा नगर निगम को समस्या से अवगत कराया गया है। इसके बावजूद अब तक कोई ऐसी ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली, जिससे नदी की स्थिति में वास्तविक सुधार हो सके।

उन्होंने कहा कि नदी केवल पानी का एक स्रोत नहीं होती, बल्कि वह किसी भी शहर के पर्यावरण, जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन का महत्वपूर्ण आधार होती है। सौरा नदी पूर्णिया की पहचान से जुड़ी हुई है। इसके बावजूद जिस तरह नदी के आसपास कचरा जमा हो रहा है, वह शहर के भविष्य के लिए चिंता का विषय है।

समाजसेवियों के अनुसार, केवल कभी-कभार सफाई करा देना इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। इसके लिए नियमित सफाई, कचरा प्रबंधन और नदी के संरक्षण की प्रभावी व्यवस्था बनानी होगी।

 

31 अक्टूबर को थाना चौक पर होगी भूख हड़ताल

सौरा नदी की बदहाली के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए युवाओं ने 31 अक्टूबर, शनिवार को थाना चौक, पूर्णिया में एक दिवसीय भूख हड़ताल करने का निर्णय लिया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पंकज नायक और शौर्य राय ने स्पष्ट किया कि यह भूख हड़ताल पूरी तरह शांतिपूर्ण होगी। इसका उद्देश्य किसी प्रकार का राजनीतिक विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि प्रशासन का ध्यान सौरा नदी की गंभीर स्थिति की ओर आकर्षित करना और उसके संरक्षण के लिए ठोस कार्रवाई की मांग करना है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि जब बार-बार अनुरोध करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो अब लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करना जरूरी हो गया है। भूख हड़ताल के माध्यम से वे प्रशासन को यह संदेश देना चाहते हैं कि सौरा नदी की उपेक्षा अब और बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

 

आम लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील

समाजसेवी शौर्य राय और पंकज नायक ने पूर्णिया के पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक संगठनों, युवाओं और आम नागरिकों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि सौरा नदी किसी एक व्यक्ति, संगठन या इलाके की संपत्ति नहीं है। यह पूरे पूर्णिया की प्राकृतिक धरोहर है। इसलिए इसे बचाने की जिम्मेदारी भी पूरे समाज की है। यदि आज शहर के लोग इसके संरक्षण के लिए एकजुट नहीं हुए तो भविष्य में इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ सकता है।

 

सवाल सिर्फ सफाई का नहीं, पूर्णिया के भविष्य का है

सौरा नदी की बदहाली का मुद्दा अब धीरे-धीरे सामाजिक आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। युवाओं की इस पहल ने एक बार फिर नदी संरक्षण और शहरी कचरा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण सवालों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

अब देखना होगा कि 31 अक्टूबर को होने वाली भूख हड़ताल के बाद जिला प्रशासन और नगर निगम इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। क्या सौरा नदी की नियमित सफाई के लिए कोई ठोस योजना बनाई जाएगी? क्या नदी किनारे कचरा फेंकने पर रोक लगाने की व्यवस्था होगी? और क्या नदी के संरक्षण के लिए जिम्मेदार विभाग अपनी जवाबदेही तय करेंगे?

फिलहाल पूर्णिया के युवाओं ने सौरा नदी को बचाने की मुहिम शुरू कर दी है। अब इस अभियान को कितना जनसमर्थन मिलता है और प्रशासन इस पर कितनी गंभीरता दिखाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

सौरा नदी को बचाने की यह लड़ाई केवल एक नदी को स्वच्छ बनाने की लड़ाई नहीं, बल्कि पूर्णिया के पर्यावरण, प्राकृतिक विरासत और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने की लड़ाई है।

 

विश्लेषण:

सौरा नदी का सवाल: क्या प्रशासन किसी बड़े आंदोलन का इंतजार कर रहा है?

पूर्णिया की सौरा नदी को बचाने के लिए युवाओं द्वारा भूख हड़ताल का ऐलान शहर के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। यह बताता है कि नदी में बढ़ते प्रदूषण और कचरे की समस्या अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि नागरिकों की चिंता और सार्वजनिक जवाबदेही का विषय बन चुकी है।

सवाल यह है कि जिस नदी को पूर्णिया की प्राकृतिक धरोहर माना जाता है, उसकी सफाई के लिए युवाओं को भूख हड़ताल करने की नौबत क्यों आ रही है? क्या नगर निगम और जिला प्रशासन के पास नदी की सफाई तथा कचरा प्रबंधन की कोई स्थायी कार्ययोजना नहीं है?

सिर्फ एक दिन सफाई अभियान चलाने से नदी की स्थिति नहीं सुधरेगी। इसके लिए नदी किनारे नियमित सफाई, कचरा फेंकने पर प्रभावी रोक, कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और प्रदूषण के स्रोतों की पहचान जरूरी है।

प्रशासन को आंदोलनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और एक समयबद्ध कार्ययोजना सार्वजनिक करनी चाहिए।

सौरा नदी किसी राजनीतिक दल या संगठन का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे पूर्णिया की साझा धरोहर है। इसे बचाने की जिम्मेदारी प्रशासन के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक की भी है।

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विशेष रिपोर्ट: मोहम्मद इरफान कामिल, पूर्णिया, बिहार | GPNBIHAR

Video Link: https://youtu.be/5TOAP4AmL3E

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